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चूना मोर्टार का घनत्व और विशिष्ट भार: संरचना, गुण और उपयोग

चिनाई और प्लास्टर के काम में चूने पर आधारित अलग-अलग मोर्टार इस्तेमाल होते हैं। चूना मोर्टार को उसके लचीलेपन, आसानी से लगाए जा सकने और वाष्प पारगम्यता के लिए महत्व दिया जाता है, लेकिन मजबूती और नमी-प्रतिरोध में वह सामान्यतः सीमेंट तथा सीमेंट-चूना मिश्रण से पीछे रहता है।

चूना मोर्टार मुख्यतः कंक्रीट, ईंट और लकड़ी की अंदरूनी तथा बाहरी सतहों पर प्लास्टर के लिए इस्तेमाल होता है। यह बहुत लचीला होता है, अलग-अलग प्रकार की सतहों से अच्छी पकड़ बनाता है और सूखी परिस्थितियों में लंबे समय तक टिकता है।

चूना मोर्टार के विशिष्ट भार की सारिणी

चूना मोर्टार का वजन केवल उसके घटकों पर नहीं, बल्कि नमी और एग्रीगेट के कण-आकार पर भी निर्भर करता है। इसकी जटिल संरचना के कारण विशेष उपकरण के बिना वजन निकालना कठिन हो सकता है। फिर भी चूना मोर्टार के 1.7 से 1.9 g/cm³ विशिष्ट भार के आधार पर 1 m³ का वजन निकाला जा सकता है। सुविधा के लिए नीचे अलग-अलग इकाइयों में एक घन मीटर चूना मोर्टार का गणितीय वजन दिया गया है।

अलग-अलग इकाइयों में चूना मोर्टार का विशिष्ट भार
सामग्री विशिष्ट भार (t/m³) 1 m³ का वजन (kg)
चूना मोर्टार 1.7 से 1.9 1700 से 1900

चूना मोर्टार की संरचना और उपयोग

चूना मोर्टार बुझा चूना और पानी मिलाकर बनाया जाता है; निर्माण कार्य के प्रकार के अनुसार आवश्यक अनुपात और शर्तों का पालन करते हुए उसमें सीमेंट भी मिलाया जा सकता है। यह बहुउपयोगी सामग्री है, क्योंकि योजक मिलाकर उसमें आवश्यक गुण विकसित किए जा सकते हैं। अंदरूनी निर्माण कार्यों के लिए चूना और रेत का मिश्रण उपयुक्त होता है, जबकि बाहरी दीवारों के लिए चूना-सीमेंट मोर्टार लिया जाता है।

चूना मोर्टार साधारण या मिश्रित भी हो सकता है। साधारण मोर्टार में केवल एक बाइंडर होता है, जबकि मिश्रित मोर्टार में एक से अधिक प्रकार के बंधनकारी पदार्थ हो सकते हैं।

चूना मोर्टार के गुण

वायु-चूना मोर्टार सूखने और कार्बोनेशन से कठोर होता है: चूना हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से अभिक्रिया करता है। हवा की पहुँच न होने पर नम वातावरण में यह प्रक्रिया धीमी रहती है। यदि मिश्रण में सीमेंट या हाइड्रॉलिक चूना हो, तो मोर्टार नम परिस्थितियों में भी मजबूती पा सकता है, लेकिन यह उसकी वास्तविक संरचना पर निर्भर करता है।

बाइंडर की मात्रा के अनुसार इस प्रकार के मोर्टार को तीन वर्गों में रखा जाता है:

  • कम बाइंडर वाला चूना मोर्टार। कठोर होने पर कम सिकुड़न के कारण यह मोर्टार पेंटिंग से पहले के कुछ कार्यों के लिए उपयुक्त होता है।
  • संतुलित चूना मोर्टार। यह अलग-अलग प्रकारों के बीच संतुलित विकल्प है और इसमें मध्यम सिकुड़न तथा योजकों की अपेक्षाकृत कम मात्रा होती है।
  • अधिक बाइंडर वाला चूना मोर्टार। इसे अधिक मात्रा में बंधनकारी घटक मिलाकर बनाया जाता है, जिससे यह अधिक लचीला और लगाने में सबसे सुविधाजनक होता है।

चूना मोर्टार घनत्व में भी अलग-अलग होता है। रेत मिलाकर मोर्टार बनाते समय रेत की सरंध्रता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अधिक सरंध्रता होने पर मोर्टार का घनत्व कम होता है और इसी के साथ उसका वजन भी घटता है।