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पत्थर का कोयला कहाँ उपयोग होता है: प्रमुख उपयोग क्षेत्र

पत्थर का कोयला लंबे समय तक ऊष्मा और ऊर्जा के मुख्य स्रोतों में रहा है। आज उसका महत्व क्षेत्र और उद्योग के अनुसार अलग-अलग है: पर्यावरणीय आवश्यकताओं के कारण ऊर्जा क्षेत्र में उसका उपयोग धीरे-धीरे सीमित किया जा रहा है, लेकिन धातुकर्म, रासायनिक उद्योग और कई तकनीकी प्रक्रियाओं में कोयले तथा उससे बने उत्पादों की माँग अब भी बनी हुई है।

पत्थर का कोयला क्या है और उसका खनन कैसे होता है?

पत्थर का कोयला काले या गहरे भूरे रंग का ठोस ज्वलनशील जीवाश्म ईंधन है। यह वनस्पति जैव पदार्थ के अवशेषों से बनता है, जो लाखों वर्षों तक दाब, तापमान और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के प्रभाव में कोयला-शैल में बदलते हैं। इस प्रक्रिया को कोयलीकरण कहते हैं। कोयले में मुख्यतः कार्बन होता है, लेकिन उसकी सटीक संरचना ग्रेड, राख की मात्रा, नमी तथा सल्फर, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन की मात्रा पर निर्भर करती है। धातुकर्मीय कोयले के लिए कोक बनने और आपस में सिंटर होने की क्षमता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

खनन उद्योगों में कोयला उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान है। खनन की विधि भंडार की गहराई, परत की मोटाई, भूगर्भीय स्थिति और आर्थिक व्यवहार्यता के अनुसार चुनी जाती है। सतह के पास मौजूद भंडार के लिए खुली खदानों में खनन किया जाता है, जबकि गहरी परतों के लिए भूमिगत खदानें इस्तेमाल होती हैं। अलग-अलग देशों में लॉन्गवॉल, रूम-एंड-पिलर, ड्रिलिंग-विस्फोट और मशीनीकृत विधियाँ अपनाई जाती हैं।

पत्थर के कोयले के प्रकार और ग्रेड

पत्थर के कोयले को रंग, कण-आकार, संरचनात्मक और आनुवंशिक विशेषताओं, प्रसंस्करण तकनीक तथा अन्य कई मानदंडों के आधार पर प्रकारों में बाँटा जाता है।

खनन और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोयले के लिए विभिन्न ग्रेड-प्रणालियाँ प्रचलित हैं। उदाहरण के लिए, एक वर्गीकरण में पत्थर के कोयले को दीर्घ-ज्वाला (Д), गैस (Г), वसायुक्त (Ж), कोकिंग (К), लीन (Т) आदि ग्रेड दिए जाते हैं। कुछ कोयला मध्यवर्ती ग्रेड में भी रखा जाता है, जैसे गैस-वसायुक्त कोयला। अमेरिका और जापान सहित कुछ देशों में अपनी अलग ग्रेड-प्रणालियाँ भी इस्तेमाल होती हैं।

पत्थर के कोयले का उपयोग किन क्षेत्रों में होता है?

पत्थर का कोयला ईंधन, तकनीकी कच्चे माल और प्रसंस्कृत उत्पादों के स्रोत के रूप में काम आता है। कोकिंग मुख्यतः धातुकर्म और रासायनिक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन कोयले के सभी उपयोग कोकिंग से संबंधित नहीं हैं। इसके प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं:

  1. ऊर्जा और ईंधन। कोयला ताप विद्युत संयंत्रों, बॉयलर हाउस और कुछ औद्योगिक भट्टियों में इस्तेमाल होता है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष द्रवीकरण द्वारा कोयले से तरल ईंधन बनाने की तकनीकें भी मौजूद हैं, लेकिन उनका उपयोग सीमित है और वह लागत, पेट्रोलियम की उपलब्धता तथा पर्यावरणीय आवश्यकताओं पर निर्भर करता है।
  2. धातुकर्म। कोकिंग कोयले को कोकिंग प्रक्रिया से धातुकर्मीय कोक में बदला जाता है। यह ब्लास्ट फर्नेस में पिग आयरन बनाने के लिए ईंधन और अपचायक का काम करता है तथा कुछ ढलाई और फेरोएलॉय प्रक्रियाओं में भी इस्तेमाल होता है।
  3. रासायनिक उद्योग। कोकिंग से कोक-ओवन गैस, कोल टार, अमोनिया उत्पाद और अन्य उप-उत्पाद मिलते हैं। कोल टार से पिच, नेफ्थलीन, फिनॉलिक यौगिक और एरोमैटिक अंश निकाले जाते हैं, जिनका उपयोग रासायनिक उद्योग, सामग्री निर्माण, इलेक्ट्रोड, सुरक्षात्मक कोटिंग और कुछ प्रकार के प्लास्टिक में होता है।
  4. कृषि और मृदा सामग्री। पत्थर का कोयला स्वयं सामान्य उर्वरक नहीं है। कृषि में कोयला प्रसंस्करण के कुछ उत्पाद, अमोनियम यौगिक, ह्यूमिक सामग्री या कार्बन योजक इस्तेमाल हो सकते हैं, लेकिन उनका उपयोग संरचना और उत्पादन तकनीक पर निर्भर करता है।
  5. परिवहन और निर्माण। ऐतिहासिक रूप से रेल परिवहन में कोयले का व्यापक उपयोग ईंधन के रूप में हुआ। आज परिवहन में उसकी भूमिका कम है, लेकिन कोयला प्रसंस्करण के उत्पाद, कोक, रेज़िन, पिच और राख-स्लैग सामग्री सड़क निर्माण, औद्योगिक कोटिंग और कुछ बुनियादी ढाँचा कार्यों में इस्तेमाल हो सकते हैं।

इस प्रकार पत्थर का कोयला केवल ईंधन नहीं, बल्कि धातुकर्म और रासायनिक उद्योग का कच्चा माल भी है। अब उसके उपयोग का आकलन उत्सर्जन, पर्यावरणीय मानकों और स्वच्छतर तकनीकों की ओर बदलाव को ध्यान में रखकर बढ़ती हुई गंभीरता से किया जाता है। इसलिए अलग-अलग देशों और उद्योगों में कोयले की भूमिका बदलती रहेगी, फिर भी कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में वह फिलहाल महत्वपूर्ण कच्चा माल बना हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पत्थर के कोयले का सबसे अधिक उपयोग कहाँ होता है?

पत्थर का कोयला ऊर्जा उत्पादन, धातुकर्म, रासायनिक उद्योग और कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होता है। धातुकर्म में कोकिंग कोयला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उससे धातुकर्मीय कोक बनाया जाता है।

कोकिंग कोयला तापीय कोयले से किस प्रकार अलग है?

कोकिंग कोयले को हवा की अनुपस्थिति में गर्म करने पर मजबूत कोक बनता है, जो ब्लास्ट फर्नेस में उपयोग के योग्य होता है। तापीय कोयला मुख्यतः ऊष्मा और बिजली पैदा करने के लिए ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पत्थर के कोयले का उपयोग सीमित क्यों किया जा रहा है?

कोयला जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड, धूल तथा राख-स्लैग अपशिष्ट निकलते हैं। इसलिए कई देशों में इसके उपयोग का आकलन पर्यावरणीय मानकों, उत्सर्जन नियंत्रण और स्वच्छतर तकनीकों की ओर बदलाव को ध्यान में रखकर किया जाता है।